Wednesday, March 29, 2006

As you go away

I remained watching the lonely way
Through the dry leaves as you go away,
You looked not back nor made reply
Days passed by and by;

I waited for thee
A whole night long,
If you come to me
Even in the dawn.

But I know not why
Wait ended not,
May be friend
You forgot,-

The days we passed
The song we sang,
All those ended
In a short span;

I thought one day,
You would come along,
Though the same lone path
After a short sojourn;

One tear fell, then became dry
Void inside me, like the vast blue sky,
Asked so many questions in deep silence
That echoed back to me;
You never came, you never knew,-
I remained waiting for thee.

Wednesday, March 01, 2006

खून की रंगोली

मृतु जहाँ आस पास हो
और जिन्देगी बहुत दूर
समय के उस घाट खरी है
आज भारत्-वासी हो मजबुर

किसी की कंगन टुट रही है
तो किसी की राखी है मजबूर
किसी दुल्हन के माथे से देखो
कोई पोछ राहा है सिन्दुर

किसी माँ के आँचल में आज
मर रही है उसकी सन्तान
कोयल के उस सुरिले धून में
बज रही है प्रलय की तान

मझब की बेदी में आज
इन्सानियत चढती है बली
हरि-भरी उस हरियाली में
खून की होती है रंगोली


कहाँ है मेर वोह सुन्हरा देश
जिसकी शाहीदो ने की थी कल्पना
मैं और तुम के इस द्वन्द में
'हम्' शब्द बन गय हैं अन्जना

शाहीदों के रुह देती है
आज विवेक को चुनौती-
क्या आज का जवान दे सकेगा फिर से
अपनी जान की अहुती?

न्याय और एकता के अदर्श से क्या
सज सकेगा यह भारत वर्ष,
याँ फिर धर्म के नाम पर चलता रहेगा
यह खून की होली
और यह मिथ्या संघर्श्!
 
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